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——-शुक्र शांति के उपाय —–

“यत्र पूज्यन्ते नारी ,तत्र रमन्ते देवता “”
अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है,वहां देवता निवास करते हैं और नि:संदेह जहाँ देवता का निवास होगा वहां सुख और समृधि स्वत: चली आएगी !अत: जातक को चाहिए वह वृद्धाओं को संरक्षण प्रदान करें ,सोभाग्यवती स्त्रियों को उचित वस्त्राभूष्ण दान करें ,गरीब कन्याओं की शिक्षा और विवाह आदि का प्रबंध करें !स्वयं की पत्नी को सदा प्रसन्न रखें,बहिन,भांजी,बहू,बेटी,माता या माता के समान स्त्रियों के दुःख दूर करने का प्रयास करें या उनकी सहानुभूति अर्जित करने मात्र से शुक्र से प्राप्त रश्मियों की मात्रा में वृधि होती है और जातक को उसके शुभ फल प्राप्त होते है !
२:शुक्र ग्रह सोन्दर्य,नमी,खद्यान का भी कारक है,अत: जातक को चाहिए कि सार्वजनिक सेवा के रूप में प्याऊ ,जलाशय निर्माण या अन्य प्रकार की जल की सुचारू सर्वसुलभ व्यवस्था करने का यत्न करें और वृक्षा रोपण भी लाभकारी सिद्ध होता है !
विशेष——-
प्राय:बार बार सुना जाता है कि इस प्रकार के कार्यों को निरपेक्ष भाव से करने वाले महानुभावो को चल -अचल सम्पति में कमी के बजाय निरंतर वृधि होती जाती है और उसी अनुपात में उनकी ख्याति व् सुख साधनो में वृधि होती है !क्योंकि जिन पदार्थो का कारक है जातक का उनके प्रति सेवा और समर्पण का भाव शुक्र को अनुकूल बनाने में समर्थ होता है अत:यथा शक्ति उक्त उपाय करने चाहिए ! —-
जय श्री राम !

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